देहरादून। श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति अध्यक्ष हेमंत दिवेदी ने गोदियाल के अनर्गल आरोपों को कांग्रेस के शर्मनाक कृत्यों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है। कहा, जिस तरह एक कार्यकर्ता और छात्रा की मौत के ग़मगीन माहौल में गोदियाल समेत तमाम कांग्रेसी अपने युवराज के स्वागत में बेशर्मी से नाचते नजर आए, वो उनकी खराब मानसिकता को दर्शाता है। वहीं पलटवार कर कहा, जिन्होंने समिति के करोड़ों रुपए के संसाधन अपनी सेवा में खर्च किए, जिन्होंने मंदिर को चंदे में मिले दान को अपने चहेतों पर लुटाया, उनका मंदिर पर ज्ञान और नैतिकता का पाठ देना दुर्भाग्यपूर्ण है। फिलहाल मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर गड़बड़ी और चोरी आदि सभी प्रकरण पर जांच चल रही है और जो भी दोषी पाया गया, उसे किसी कीमत पत्र बख्शा नहीं जाएगा गोदियाल पर बिना तथ्यों एवं प्रमाणों के झूठे आरोप लगाकर जांच प्रभावित करने और दोषियों को बचाने की कोशिश लगाया है।
पार्टी मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा, श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। यह किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि पूरे देश की श्रद्धा का विषय है। प्रदेश में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्री पुष्कर धामी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की सरकार कार्य कर रही है। वर्तमान गड़बड़ी और चोरी के सामने आए दुर्भाग्यपूर्ण प्रकरण को मुख्यमंत्री ने पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता से लिया है। उनके निर्देश पर उच्च स्तरीय जांच चल रही है, इसलिए हमारा उद्देश्य किसी को बचाना या इसकी छवि को खराब करना नहीं, बल्कि हम चाहते है कि सत्य सबके सामने आना चाहिए। इन सारे मामलों में तीन तरह की जांच चल रही है
एसआईटी, विभागीय जांच, और उच्च स्तरीय जांच राज्य स्तर पर कमिश्नर की अध्यक्षता में जांच गतिमान है। आज पूर्व अध्यक्ष, श्री बद्री-केदार मंदिर समिति और वर्तमान में कांग्रेस के अध्यक्ष, गणेश गोदियाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि मंदिर के ‘चंदा चोर’ आरोपों में जो दूसरा अभियुक्त गिरफ्तार हुआ है, उसने यह कहा है कि उसको ऊपर से निर्देश मिलते थे। मैं जानना चाहता हूँ कि गोदियाल जी को यह जानकारी कहाँ से मिली? क्या आरोपी से उनकी कोई बातचीत हुई है या पुलिस की जो जांच कर रही है, उसमें गोदियाल जी को कोई जानकारी प्राप्त हुई है? क्योंकि यह कहीं पर भी पब्लिक डोमेन में, मेरी जानकारी में यह बात नहीं है। और अगर यह बात झूठी है, तो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि वह कहीं ना कहीं इस जांच को प्रभावित करने के लिए, दोषियों को बचाने के लिए, इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं।
वहीं जोर देते हुए कहा कि मंदिर में चंदा चोरी के जघन्य अपराध में जो भी कोई लिप्त होगा, उसको किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। हमारे प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री जी के सख्त निर्देश हैं और इस प्रकरण में उन्होंने स्पष्ट कहा भी है कि कोई भी दोषी होगा, उसको किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। और मैं स्वयं इस बात के लिए प्रतिबद्ध हूँ कि इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी अलग होकर सबके सामने आना चाहिए।
कहा, गोदियाल जी से पूछना चाहता हूँ कि जब वह बद्रीनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष थे, तो क्या उन्हें सारे काम के निर्देश राहुल गांधी या प्रियंका गांधी जी से मिलते थे? अगर ऐसी परंपरा थी, जिसके आधार पर वह दावा कर रहे हैं, तो मैं उनको बताना चाहता हूँ कि यह भारतीय जनता पार्टी की परंपरा नहीं है। उनके यहाँ यह परंपरा रही होगी, शायद उसी परंपरा के आधार पर वह इस तरह की बेतुकी बातें कर रहे हैं। भाजपा में कभी भी किसी गलत काम को करने की शिक्षा नहीं दी जाती है। हमारी पार्टी सनातन के मार्गदर्शन में चलने वाली पार्टी है, जहाँ किसी को दिखाने के लिए ईमानदारी का ढोंग नहीं करना पड़ता है। हमारी पार्टी स्वयं से अनुशासित होकर, अनुशासित रहने का मंत्र देकर जनसेवा की सीख देती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति से भी नहीं है, किसी दल से भी नहीं है, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए है। बद्री-केदार की पवित्रता और श्रद्धालुओं के विश्वास से कोई समझौता नहीं होगा। यदि कोई दोषी होगा, तो उसे कानून अपने अनुसार दंड मिलेग और यदि कोई निर्दोष है, तो उस पर राजनीति करने के आरोप लगाने वालों को उनकी ही भाषा में करारा जवाब दिया जाएगा।
कहा, जिस प्रकार उन्होंने आज कहा, जिस कर्मचारी के ऊपर यह आरोप लगे हैं वे मेरे करीबी थे, जबकि उसकी 2003 में नियुक्ति हुई थी। वह मुंबई में एक कंपनी थी, जिसमें वह कार्यरत था। वहाँ से वह आया था, उसको एक टेंपरेरी नौकरी वहाँ पर मिली थी, इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद पर। लगातार वह इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद पर काम कर रहा था। उसके बाद सरकार से जो 34 पद स्वीकृत होकर आए उसमें एक पद इंटरनेट कोऑर्डिनेटर का स्वीकृत होकर आया था। उन्होंने उसको स्थाई किया, उनके हस्ताक्षरों से वह स्थाई हुआ। उन्होंने सारे नियम-कानूनों को साइड रखते हुए, एक्ट का उल्लंघन करते हुए, आखिर उस 34 लोगों में से उसी कर्मचारी को वैयक्तिक सहायक के पद पर सीधे बिठा दिया! जबकि इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद का कोई वहाँ पर समायोजन का कोई प्रावधान नहीं है। आप पद को समायोजित नहीं कर सकते हैं। आज की तारीख में भी वह इंटरनेट कोऑर्डिनेटर का पद यहाँ पर खाली है विभाग के अंदर। और उन्होंने सीधे उसको वैयक्तिक सहायक पर पदोन्नति देकर, जो 1984 से एक पद खाली था। आखिर उनका ऐसा क्या प्रेम था? सिर्फ एक व्यक्ति को ही लगातार उन्होंने दो प्रोन्नति दे दी! 2800 ग्रेड पे से सीधे 4600 के पद पर लेकर आ गए!
वहीं बतौर अध्यक्ष समिति के संसाधनों के दुरुपयोग और वित्तीय डकैती के आरोप लगाते हुए कहा, वह बार-बार यह कहते हैं साहब कि वैयक्तिक सहायक को अपने साथ ले गए। जबकि मैंने14 महीने का मेरा कार्यकाल है, मैंने एक भी बद्री-केदार मंदिर समिति का स्टाफ अपने साथ में नहीं रखा हुआ है। और इस बार की जो यात्रा वह ऐतिहासिक यात्रा रही है। इतनी अधिक संख्या में देश भर से तीर्थयात्री वहाँ पर आए। और मंदिर समिति के पास आप जानते हैं कि सीमित स्टाफ है। हमने निर्णय लिया कि सारा स्टाफ फील्ड में काम करेगा। कोई मेरे पास एक स्टाफ नहीं रहता है। जो आज यह बात कह रहे हैं, 10-10 लोगों का स्टाफ उनके घरों में, उनके विद्यालय में, उनके राजनीतिक फील्ड में हमेशा रहा है। उन्होंने किस तरह से मंदिर समिति का दुरुपयोग किया, किस तरह से लूटपाट मचाई, उसके प्रमाण पुख्ता हैं। 2025 में, यह कमिश्नर, तत्कालीन कमिश्नर सुशील कुमार की जांच रिपोर्ट में वह सारी चीजें यहाँ पर आई हुई हैं। गोदियाल कहते हैं कि ‘मैं ₹1 भी नहीं लेता हूँ जबकि वे विधानसभा में सदस्य थे? विधायक की तनख्वाह वहाँ से लेते थे और सारा लाभ संसाधन करोड़ों रुपए का आपने बद्री-केदार मंदिर समिति से लिया था। थे!
आरोप लगाते हुए कहा, उन्होंने अपने उस 5 साल के कार्यकाल में अधीनस्थ मंदिरों में, धर्मशालाओं में—27 धर्मशालाएं हैं हमारी, 7 हमारे संस्कृत विद्यालय हैं—उन पर कहीं पर भी उन्होंने ₹1 भी खर्च नहीं किया। और लाखों-करोड़ों रुपया बाहर खर्च किया। इससे भी ज्यादा देखिए कि मंदिर समिति के उन्होंने जो बजट था, उसमें साफ एक्ट में प्रावधान है, क्योंकि मंदिर की आय का स्रोत दान के पैसों से, जो दानदाता हैं, उन दानदाताओं से ही मंदिर का खर्चा चलता है। लेकिन उन्होंने सारे एक्ट को, सारे नियम-कानूनों को धता बताते हुए, उन्होंने अपनी विधानसभा क्षेत्र के अंदर पैसा लगाया, उन्होंने जो अपना कॉलेज है वहाँ पर, उस कॉलेज के अंदर पैसा लगाया। उन्होंने विवेकाधीन कोष जैसे ही मंदिर समिति के धन का दुरुपयोग किया। वह चोरी की बात कर रहे हैं, चंदा चोरी? उन्होंने तो डकैती मचाई। उस चंदा डकैत ने जैसे विवेकाधीन कोष से पैसा बांटा जाता है, व्यक्तिगत लोगों को उन्होंने कई लोगों को अपनी विधानसभा के अंदर 25,000, 50,000, 1 लाख, 2 लाख, 5 लाख दिया। उन्होंने ऐसा पैसा लुटाया है और आज वह यह दुहाई देते हैं कि चंदा चोरी! चंदा चोरी!
जबकि यह घटना हमारे संज्ञान में आई, तत्काल कठोर कार्रवाई करते हुए शो-कॉज नोटिस जारी किए, जांच समिति बना दी। माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर तत्काल उन्होंने इसकी गंभीरता को देखते हुए इस पर। इसका संज्ञान लिया और उसके बाद उन्होंने इस पर उच्च स्तरीय कमेटी बना दी और जांच आज भी गतिमान है। लगातार उसमें जो है कि जो भी इसमें संलिप्त होंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई हो रही है, वह जेल जा रहे हैं। लेकिन वह किस तरह से इसका राजनीतिकरण कर रहे हैं और किस तरह से लोगों को वह दिग्भ्रमित कर रहे हैं?
अभी हाल ही में परसों देखिए आप, उनकी तो संवेदनाएं मर चुकी हैं। उनके अंदर ना संवेदनाएं हैं, ना मर्यादाएं हैं। आज जिस बिटिया ने आत्महत्या की थी, उसकी फोटो लगी है उस मंच में, उसके पिताजी उस मंच पर खड़े हैं। और उसी दिन शाम को जो है कि एक कांग्रेस कार्यकर्ता की जो है कि वहाँ पर जो है कि मृत्यु हो जाती है, एक दुर्घटना घट जाती है। और देखिए वह किस प्रकार से डांस कर रहे हैं! किस प्रकार से वह नाच रहे हैं वहाँ पर! कुछ तो शर्म करे कांग्रेसी। जो वहां डांस कर रहे हैं उनकी संवेदनाएं खत्म हो गई थी और अब पोल खुल गई तो भ्रमित करने के लिए, इस मुद्दे को भटकाने के लिए, मर्यादा की बात करते हैं उनका कार्यकर्ता, वह किस तरह से उसने अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया है और किस तरह से उसने सोशल मीडिया पर महिलाओं के खिलाफ उन्होंने किस तरह का किस तरह की बातें कही हैं।आपको तो किसी पर भरोसा ही नहीं! देश के निर्वाचन आयोग पर भरोसा नहीं है, देश की सीबीआई पर भरोसा नहीं है, देश की किसी जांच एजेंसी पर आपको भरोसा नहीं है। फिलहाल जांच होने दीजिए, जांच आने दीजिए, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
इस दौरान पत्रकार वार्ता में प्रदेश सह मीडिया प्रभारी राजेंद्र नेगी, प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी एवं प्रदेश मीडिया संपर्क संयोजक हरीश चमोली भी मौजूद थे।

