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उत्तराखंड की राजनीति में नया इतिहास, धामी लगातार 5 वर्ष पूरे करने वाले दूसरे मुख्यमंत्री

हरीश चमोली

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में 4 जुलाई एक महत्वपूर्ण तारीख के रूप में दर्ज होने जा रही है। इस दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करेंगे। राज्य गठन के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के बाद दूसरे मुख्यमंत्री होंगे। उत्तराखंड जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में, जहां सरकारों और मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल अक्सर बदलावों से प्रभावित रहा है, वहां लगातार पांच वर्ष तक नेतृत्व बनाए रखना अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक रिकॉर्ड माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री धामी ने ऐसे समय में प्रदेश की कमान संभाली थी, जब राज्य कई चुनौतियों का सामना कर रहा था। इसके बावजूद उन्होंने संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए विकास को गति देने का प्रयास किया। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को लगातार दूसरी बार सत्ता में वापस लाना भी उनके नेतृत्व की बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जाता है।
अपने कार्यकाल में मुख्यमंत्री धामी ने कई ऐसे फैसले लिए, जिनकी प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हुई। इनमें समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में पहल, नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून को सख्त बनाना, महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता, निवेश को बढ़ावा देने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं में सुधार, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में आधारभूत ढांचे का विस्तार, तथा युवा और स्वरोजगार योजनाओं को बढ़ावा जैसे कई निर्णय प्रमुख रहे हैं।
इसके साथ ही राज्य में औद्योगिक निवेश आकर्षित करने, पर्यटन को नई पहचान देने, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी सरकार ने कई कदम उठाए। सरकार का दावा है कि इन प्रयासों से उत्तराखंड विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
लगातार पांच वर्ष तक मुख्यमंत्री बने रहना केवल संगठन के विश्वास का ही नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक स्वीकार्यता का भी संकेत है। ऐसे में 4 जुलाई का दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के राजनीतिक सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
उत्तराखंड की राजनीति में यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि राज्य गठन के बाद अधिकांश मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल पूरा नहीं हो सका। ऐसे में नारायण दत्त तिवारी के बाद पुष्कर सिंह धामी का यह रिकॉर्ड राज्य के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगा।

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