गौचर। पोखरी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाला बमोथ गांव इन दिनों एक नई सामाजिक पहल के कारण चर्चा में है। गांव की प्रधान रूचि देवी के नेतृत्व में शुरू की गई शराबबंदी अब सिर्फ एक निर्णय नहीं, बल्कि एक सफल सामाजिक बदलाव के रूप में सामने आ रही है। हाल ही में गांव में संपन्न हुई कई शादियों में इसका स्पष्ट असर देखने को मिला, जहां पूरी तरह से शराबमुक्त आयोजन किए गए।
गांव के निवासी गिरीश पुरोहित के बेटे की शादी इस बदलाव की पहली बड़ी मिसाल बनी, जिसमें बिना शराब के शांतिपूर्ण और पारिवारिक माहौल में सभी रस्में संपन्न हुईं। इसके बाद जितेंद्र मल्ल, बसुदेव नेगी और गिरीश लाल के यहां हुई शादियों में भी शराब का पूरी तरह बहिष्कार किया गया। इन आयोजनों में न केवल अनुशासन बना रहा, बल्कि आपसी सौहार्द और पारिवारिक माहौल भी पहले से अधिक मजबूत नजर आया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले शादियों में शराब के कारण कई बार विवाद और अव्यवस्था की स्थिति बन जाती थी, जिससे खुशी के मौके पर भी तनाव पैदा हो जाता था। लेकिन अब शराबबंदी के कारण माहौल अधिक सकारात्मक और सुरक्षित हो गया है। खासकर महिलाओं और बुजुर्गों ने इस पहल की सराहना की है।
प्रधान रूचि देवी ने कहा कि हमारा उद्देश्य गांव में एक स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण बनाना है। शराबबंदी का फैसला आसान नहीं था, लेकिन गांव के लोगों के सहयोग से यह संभव हो पाया। शादियों में इसका असर देखकर बहुत खुशी हो रही है। अब हमारे यहां के समारोह अधिक अनुशासित और पारिवारिक हो गए हैं। हम आगे भी इस पहल को जारी रखेंगे और अन्य गांवों को भी प्रेरित करने का प्रयास करेंगे।
इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि यदि स्थानीय स्तर पर मजबूत नेतृत्व और सामूहिक सहयोग हो, तो बड़े सामाजिक बदलाव भी संभव हैं। बमोथ गांव की यह कहानी अब अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणा बन सकती है।
बमोथ गांव में शराबबंदी की पहल बनी मिसाल, शादियों में दिखा सकारात्मक असर

