देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में आवागमन को सुगम बनाने और पर्यटन को नई गति देने के लिए रोपवे नेटवर्क के विस्तार की दिशा में राज्य सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रदेश में प्रस्तावित 51 रोपवे परियोजनाएं न केवल दुर्गम क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगी, बल्कि तीर्थाटन, पर्यटन, स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देने की क्षमता रखती हैं। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती हनी पाठक ने इन परियोजनाओं को उत्तराखंड के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के प्रयासों की सराहना की।
राज्य और केंद्र सरकार की साझेदारी में प्रदेश में लगभग 160 किलोमीटर लंबाई की 51 रोपवे परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन का जिम्मा राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML), उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन, शहरी विकास एवं भवन निर्माण निगम और पर्यटन विभाग को सौंपा गया है।
भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती हनी पाठक ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए धामी सरकार की सराहना की है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार देवभूमि उत्तराखंड को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
श्रीमती पाठक ने कहा कि उत्तराखंड में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का सपना था, जिसे मुख्यमंत्री धामी जी पूरी निष्ठा के साथ धरातल पर उतार रहे हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से तीर्थयात्रियों, श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को आवागमन में अभूतपूर्व सुविधा मिलेगी।
उन्होंने जानकारी दी कि प्रथम चरण की प्रमुख 6 परियोजनाओं में सोनप्रयाग-केदारनाथ (रुद्रप्रयाग), गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब (चमोली), रानीबाग-हनुमानगढ़ी-कैंची धाम (नैनीताल), कनकचौरी-कार्तिक स्वामी (रुद्रप्रयाग), जोशीमठ-औली-गोरसों (चमोली) और रैथल-दयारा बुग्याल (उत्तरकाशी) शामिल हैं।
श्रीमती पाठक ने कहा कि इन रोपवे के बनने से खच्चरों और घोड़ों पर होने वाली कठिन यात्रा से निजात मिलेगी और पशु क्रूरता पर भी रोक लगेगी। उत्तराखंड एक टूरिज्म स्टेट है और इस वर्ष 50 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम दर्शन के लिए आ चुके हैं। ऐसे में ये परियोजनाएं प्रदेश के पर्यटन, रोजगार और समग्र विकास के लिए मील का पत्थर साबित होंगी।

