हरीश चमोली
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को नया जिलाधिकारी मिल गया है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आशीष चौहान को जिले की कमान सौंपे जाने के बाद प्रशासनिक गलियारों में नई उम्मीदों और तेज़ फैसलों की चर्चा शुरू हो गई है।
आशीष चौहान अपनी शांत कार्यशैली, ज़मीनी पकड़ और विकासोन्मुख प्रशासन के लिए जाने जाते हैं। इससे पहले भी वे उत्तराखंड के कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। पौड़ी गढ़वाल में जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने जनसुनवाई, सड़क संपर्क, आपदा प्रबंधन और ग्रामीण विकास के मुद्दों पर विशेष काम किया था।
आशीष चौहान की पहचान उन अधिकारियों में होती है जो सिर्फ दफ्तर तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सीधे जनता के बीच जाकर समस्याएं सुनते हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच उनकी छवि अनुशासित लेकिन सहयोगात्मक अधिकारी की रही है।
पौड़ी में उनके विदाई समारोह के दौरान कई अधिकारियों ने उन्हें “जमीन से जुड़ा प्रशासनिक अधिकारी” बताया था, जिसने विकास योजनाओं को फाइलों से निकालकर धरातल तक पहुंचाने का काम किया।
देहरादून इस समय ट्रैफिक जाम, अतिक्रमण, पेयजल संकट, बढ़ते शहरी दबाव और मानसून आपदा जैसी कई चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में नए जिलाधिकारी के रूप में आशीष चौहान के सामने प्रशासनिक संतुलन और विकास की रफ्तार बनाए रखना बड़ी जिम्मेदारी होगी।
राजधानी होने के कारण देहरादून में शासन, राजनीति और आम जनता तीनों की अपेक्षाएं जिलाधिकारी से सीधे जुड़ी रहती हैं। माना जा रहा है कि चौहान प्रशासनिक सख्ती के साथ तकनीक आधारित मॉनिटरिंग और जनभागीदारी मॉडल पर फोकस कर सकते हैं। आईएएस अधिकारियों की नई पीढ़ी में आशीष चौहान को एक ऊर्जावान अधिकारी माना जाता है। उनकी कार्यशैली में फील्ड विजिट, त्वरित निर्णय और टीम समन्वय प्रमुख रूप से दिखाई देता है।
देहरादून जैसे तेजी से बढ़ते शहर में अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि नए डीएम शहर की मूल समस्याओं पर कितनी तेजी और प्रभावशीलता से काम करते हैं।
राजधानी को अब एक ऐसे प्रशासनिक नेतृत्व की उम्मीद है, जो विकास और व्यवस्था दोनों के बीच बेहतर संतुलन बना सके।

