भूपेंद्र रोतेला
नारायणबगड़। माँ नन्दा धाम भारकोट बार भंगोटा, विकासखंड नारायणबगड़ में आयोजित ऐतिहासिक नन्दा कौथिग का भावुक माहौल में समापन हुआ। घुड़ेत नृत्य और हाथी पर विराजमान मां नन्दा की विदाई के दौरान श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण के बीच ध्याणियों ने अपनी आराध्य देवी मां नन्दा को भावपूर्ण विदाई दी।
कौथिग का शुभारंभ भूमियाल देवता की निशाण नृत्य और घुड़ेत नृत्य के साथ हुआ। जागर सम्राट बुद्धिसिंह दानू ने पौराणिक लोकगीतों और जागरों की प्रस्तुति दी, जबकि जागर पुरोंधा दानू के भावुक गीतों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। ऐसा प्रतीत हुआ मानो समूचा कड़ाकोट क्षेत्र अपनी ध्याण मां नन्दा को विदाई देने के लिए उमड़ पड़ा हो। मां नन्दा सांस्कृतिक टीम द्वारा प्रस्तुत संगीत ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
मां नन्दा की विदाई के ऐतिहासिक अवसर पर मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक भूपाल राम टमटा रहे। इस दौरान कमलेश सती, मोनू सती, नरेंद्र भंडारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। विधायक भूपाल राम टमटा ने महिताप सिंह सजवाण द्वारा रचित पुस्तिकाओं ‘मध्य कड़ाकोट’ तथा ‘हमारी विरासत—ॐ मृत्युंजय महादेव मंदिर देवधुरा’ का लोकार्पण भी किया। इन पुस्तिकाओं का प्रकाशन धीरेन्द्र बूटोला और भूपेंद्र रौतेला (हैप्पी) द्वारा किया गया है।
इस अवसर पर ऐतिहासिक मान्यता की जानकारी देते हुए वर्तमान कनिष्ठ प्रमुख नारायणबगड़ भूपेंद्र मेहरा ने बताया कि जब मां नन्दा कैलाश की ओर जा रही थीं, तब मायके पक्ष की ओर से उन्हें समौंण भेंट की गई। समौंण अत्यधिक भारी होने के कारण थकानवश मां नन्दा ने उसे भारकोट क्षेत्र में रख दिया। मान्यता है कि इसी स्थान पर मां नन्दा का स्वरूप विस्थापित हुआ और यही स्थान आगे चलकर सोल्टा गांव के रूप में प्रसिद्ध हुआ, जो आज भारकोट गांव में स्थित है।
मां नन्दा का यह पावन पर्व तीन वर्षों में एक बार आयोजित किया जाता है। मेला समिति के अध्यक्ष और सचिव ने सभी श्रद्धालुओं की कुशलता की कामना करते हुए आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों और दूर-दूर से पहुंचे भक्तों का आभार व्यक्त किया।
भावुक माहौल में हुई मां नन्दा की विदाई

