नई दिल्ली। डॉ. नरेश बंसल, भाजपा के राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद ने सदन में मिशन वात्सल्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रश्न उठाया। उन्होंने बच्चों की देखभाल के लिए परिवार आधारित गैर-संस्थागत व्यवस्था, वात्सल्य सदनों की स्थापना और लापता बच्चों की ट्रैकिंग व्यवस्था को लेकर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी।
इस पर जवाब देते हुए सावित्री ठाकुर, महिला एवं बाल विकास मंत्री ने बताया कि मिशन वात्सल्य के तहत बच्चों की सुरक्षा और देखभाल के लिए केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से कार्य कर रही है। इस योजना के अंतर्गत देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों (CNCP) और विधि का उल्लंघन करने वाले बच्चों (CCL) को संस्थागत और गैर-संस्थागत दोनों प्रकार की सेवाएं प्रदान की जाती हैं।
मंत्री ने कहा कि सरकार परिवार आधारित गैर-संस्थागत देखभाल को प्राथमिकता दे रही है, जिसमें प्रायोजन, पालन-पोषण (फोस्टर केयर), दत्तक ग्रहण और पश्चात देखरेख जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। इसके तहत पात्र बच्चों को प्रतिमाह 4000 रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जाती है, ताकि उन्हें परिवार के वातावरण में बेहतर संरक्षण मिल सके।
वात्सल्य सदनों के संबंध में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि अब तक देशभर में कुल 69 वात्सल्य सदनों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनका राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशवार विवरण उपलब्ध है।
लापता बच्चों की खोज और प्रबंधन को लेकर सरकार ने तकनीकी एकीकरण पर भी जोर दिया है। ट्रैक चाइल्ड पोर्टल, खोया-पाया ऐप और CARINGS पोर्टल को मिशन वात्सल्य पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया है। यह प्रणाली गृह मंत्रालय के CCTNS से भी जुड़ी है, जिससे लापता बच्चों की एफआईआर और डेटा का मिलान करना आसान हो गया है।
सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि वे लापता बच्चों के मामलों के लिए राज्य और जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करें। इन अधिकारियों का विवरण मिशन वात्सल्य पोर्टल पर अपलोड किया गया है, जिससे विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित हो सके।
यह पहल बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
राज्यसभा में मिशन वात्सल्य पर उठे महत्वपूर्ण सवाल, केंद्र सरकार ने दी विस्तृत जानकारी

