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मॉनसून ने उत्तराखण्ड में अब तक ली 75 जानें, 90 से ज्यादा लापता

देहरादून। इस साल उत्तराखंड के लिए मॉनसून सीजन आफत भरा रहा है। मॉनसून उत्तराखंड को कई ऐसे जख्म दे गया है, जिन्हें भरने में न जाने कितने साल लग जाएंगे। कुछ इलाकों में तो ऐसी त्रासदी आई है, जिनसे पूरे इलाके का भूगोल ही बदल कर रख दिया। गढ़वाल हो या फिर कुमाऊं उत्तराखंड के दोनों मंडलों में बारिश ने इस बार जमकर तांडव मचाया है, जिसने कई लोगों की जान ली है। वहीं कई लोग तो अभी भी लापता हैं।
उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल बारिश ने अभी तक 75 लोगों की जान ली है। वहीं करोड़ों रुपए का नुकसान भी हुआ है। 90 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। घायलों की बात की जाए तो उनका आंकड़ा भी 107 के पार है, जिनको खोजने के लिए अलग-अलग जगह पर कई एजेंसियां सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
इन आपदाओं ने न सिर्फ इंसान, बल्कि मवेशियों की बड़ी संख्या में मौत हुई है। 1430 से अधिक बेजुबान अपनी जान गवा चुके हैं। जबकि 226 मकान पूरी तरह से इस आसमानी बारिश में तबाह हुए हैं। लगभग 31 घर प्रदेश में अलग-अलग जगह पर ऐसे भी हैं, जहां पर दरार या गंभीर क्षति पहुंची है। वहीं 1828 मकान ऐसे हैं, जिन्हें मरम्मत की मानसून के बाद दरकार होगी।
190 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को भी इस बारिश ने काफी नुकसान पहुंचा है, जिससे किसानों की पूरी तरह से कमर टूट गई है। आपदा ग्रस्त कई इलाके अभी भी अपने जिला और तहसील मुख्यालय से कटे हुए हैं।
उत्तराखंड शासन मॉनसून रुकने के बाद सभी जिला अधिकारियों से अपने-अपने जनपदों में हुए नुकसान का ब्यौरा मांग रहा है। मुख्य सचिव आनंद वर्धन की तरफ से सभी विभागों को पहले ही यह दिशा-निर्देश दे दिए गए थे कि अपने-अपने विभागों में हुए नुकसान की पूरी जानकारी शासन को मुहैया कराए। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्धन के मुताबिक उत्तराखंड में जिन जगहों पर लोगों का पुनर्वास होना है, उनके पुनर्वास का प्लान तैयार किया जा रहा है। वहीं नुकसान का आकलन करके केंद्र सरकार से सहायता का आग्रह किया जाएगा। जल्द ही केंद्र सरकार को राज्य में हुए नुकसान का प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसके बाद केंद्र से यही उम्मीद है कि वो आपदा मद से राहत राशि देंगे।
पांच अगस्त को उत्तरकाशी के धराली में आपदा आई थी, जिसमें 6 लोगों की मौत हुई थी। वहीं 65 लोग लापता हो गए थे। इसके अलावा उत्तरकाशी के ही स्याना चट्टी में यमुना नदी का प्रवाह रुकने से झील बन गई थी। इस कारण पूरे इलाके में पानी भर गया था। कस्बे के होटल और मकान पूरी तरह से जलमग्न हो गए थे, जिससे पूरे इलाके को बड़ा खतरा हो गया था। वहीं इस साल मॉनसून के शुरुआत में ही उत्तरकाशी जिले में ही हाईवे पर पहाड़ से पानी का सैलाब आया था। इस सैलाब में हाईवे के निर्माण कार्य में लगे सात मजदूर बह गए थे, जिनका अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है। इसी तरह उत्तरकाशी जिले में ही घर के ऊपर मलबा गिर गया था, जिस कारण तीन लोगों की मौत हो गई थी। उत्तरकाशी के अलावा चमोली के थराली, रुद्रप्रयाग और पौड़ी गढ़वाल में भी बारिश से कई लोगों की जानें गई है। हालांकि इस मॉनसून सीजन में सबसे ज्यादा नुकसान और मौतें उत्तरकाशी जिले में ही हुई है।
अब तक शासन को मिली जानकारी के अनुसारः पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) को 554.38 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। पेयजल निगम को 90 करोड़ रुपए की क्षति पहुंची। लघु सिंचाई को 35 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। पंचायती राज विभाग को 10 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। ऊर्जा विभाग को 448 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। पीएमजीएसवाई को 415 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इसी तरह सिंचाई विभाग को भी 400 से अधिक करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

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