गिग इकॉनमी के साथ ही प्रत्यक्ष बिक्री उद्योग को होगा फायदाः ऋषि चंडियोक

देहरादून । निदेशक (दक्षिण एशिया) क्यूनेट ऋषि चंडियोक का कहना है कि समय बेहद चुनौतीपूर्ण है। कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के मामलों में कमी नहीं आ रही है और जल्द इससे राहत की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। जब लॉकडाउन की शुरुआत हुई थी तब किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि इसका अर्थव्यवस्था पर कैसे विनाशकारी प्रभाव होगा। वेतन में कटौती और कारोबारों के बंद होने की वजह से पूरी व्यवस्था धाराशायी होती दिखी, जो पहले से ही चुनौतियों से जूझ रही थी। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के मुताबिक, मई 2021 में बेरोजगारी दर पिछले एक साल में सबसे ज्यादा थी, क्योंकि यह बढ़कर 11.90 फीसदी हो गई थी। महामारी की दूसरी लहर के गंभीर प्रभावों के कारण, उसी महीने में शहरी बेरोजगारी दर बढ़कर 14.73 प्रतिशत हो गई थी।
कोविड -19 महामारी की दूसरी लहर के बीच अकेले जुलाई में कम से कम 32 लाख वेतनभोगी भारतीयों ने नौकरी खो दी, हालांकि समग्र बेरोजगारी दर में महीने-दर-महीने 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है, सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों से पता चलता है। संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच अन्य देशों की तरह भारत ने भी अपने दायरे में ध्यान केंद्रित करने की शुरुआत की। ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहल ने कारोबारों को उनकी रणनीतियों को पुनर्गठित करने के लिए प्रेरित किया। इस रुख से स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहन मिला और साथ ही तेजी से उभरते युवा उद्यमियों के बीच स्वामित्व की भावना का संचार हुआ। डायरेक्ट सेलिंग (प्रत्यक्ष बिक्री) भी बेहद कम शुरुआती निवेश के साथ कारोबारी मौका उपलब्ध कराता है, जिसमें अपने समय के मुताबिक काम करने का लचीलापन शामिल है। हालांकि आत्मनिर्भरता हमेशा से ही डायरेक्ट सेलिंग के मामले में केंद्र में रहा है। आपका खुद का कारोबार चलाने का मतलब आपके लिए यह तय करना है कि आपको अपने कारोबार को आगे बढ़ाना है या फिर उसे डुबाना है।

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