देहरादून। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री विकसित भारत रोज़गार योजना (पीएमवीबीआरवाई) देश के युवाओं के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है। करीब 3 लाख करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय वाली इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत दो वर्षों में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित किए जाने का लक्ष्य तय किया गया है।
इस योजना का विशेष फोकस पहाड़ी और सीमावर्ती जिलों में पलायन रोकने पर है। इसके लिए इको-टूरिज्म, बागवानी, हथकरघा, हस्तशिल्प, स्थानीय उद्यमिता और कौशल आधारित रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि युवाओं को अपने ही क्षेत्र में आजीविका के बेहतर अवसर मिल सकें।
प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट द्वारा राज्यसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री सुश्री शोभा कारान्दलाजे ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योजना 1 अगस्त 2025 से लागू की गई है और इसकी पंजीकरण अवधि 31 जुलाई 2027 तक रखी गई है।
मंत्री ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए कौशल प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप, उद्यमिता सहायता, डिजिटल कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही, दूरस्थ कार्य (रिमोट वर्क) के अवसरों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सरकार द्वारा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना, मुद्रा योजना, राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम सहित कई योजनाओं को एकीकृत रूप से लागू किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
इसके अलावा, युवाओं के लिए राष्ट्रीय करियर सेवा (NCS) पोर्टल के माध्यम से नौकरी खोज, करियर परामर्श, रोजगार मेले और कौशल प्रशिक्षण की सुविधाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सरकार ने श्रमिकों की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चार श्रम संहिताओं को भी लागू किया है, जिनसे असंगठित, गिग और प्रवासी श्रमिकों को समान न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और बेहतर कार्यदशाओं का लाभ मिलेगा।
कुल मिलाकर, पीएमवीबीआरवाई योजना न सिर्फ रोजगार सृजन की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों में पलायन रोकने की दिशा में भी एक मजबूत कदम है।
भट्ट के प्रयास रंग लाए: पीएम विकसित भारत रोज़गार योजना से 3.5 करोड़ रोजगार, पहाड़ी जिलों पर विशेष फोकस
