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केंद्र का उत्तराखंड को बड़ा समर्थन, कैम्पा व वन्यजीव संरक्षण के लिए 210 करोड़ से अधिक की मदद

देहरादून। भारत सरकार ने वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025–26 में उत्तराखंड के वनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए कैम्पा फंड के तहत 150 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जारी की है। इसके साथ ही वन्यजीव संरक्षण के लिए 60 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त सहायता भी राज्य को दी गई है। यह जानकारी प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने राज्यसभा में पूछे गए सवालों के उत्तर के माध्यम से साझा की।
कैम्पा फंड से वनों के संरक्षण को मजबूती
महेंद्र भट्ट द्वारा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से पूछे गए प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्तवर्धन सिंह ने बताया कि वर्ष 2025–26 के दौरान राष्ट्रीय कैम्पा प्राधिकरण द्वारा उत्तराखंड को 156.52 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। यह राशि वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के तहत वन भूमि के विचलन के कारण प्रतिपूरक शुल्क के रूप में प्राप्त हुई है।
यह धनराशि प्रतिपूरक वनीकरण निधि अधिनियम, 2016 और नियम, 2018 के अंतर्गत विभिन्न कार्यों में उपयोग की जा रही है, जिनमें—
वनों का सुधार एवं संवर्धन
वन्यजीव संरक्षण
कृत्रिम एवं प्राकृतिक उत्थान
वनों की सुरक्षा
वन आधारित आधारभूत ढांचे का विकास
वन एवं वन्यजीव प्रबंधन से जुड़े सहायक कार्य शामिल हैं।
वन्यजीव संरक्षण के लिए 60.81 करोड़ रुपये जारी
इसी क्रम में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सवाल के जवाब में बताया गया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में राज्य को 60.81 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। इसमें—
एकीकृत वन्यजीव प्रबंधन कार्यक्रम: 10 करोड़
वन्यजीव परिदृश्य पुनर्स्थापन: 32.50 करोड़
पर्यावास सुधार (जल कुंड, चारागाह विकास, आक्रामक प्रजाति प्रबंधन): 3.88 करोड़
अवैध शिकार विरोधी कार्य: 2.11 करोड़
मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन: 7.32 करोड़
वन्य पशु बचाव एवं पुनर्वास केंद्र: 4 करोड़
हिम तेंदुआ संरक्षण केंद्र, उत्तरकाशी: 1 करोड़
की राशि शामिल है।
राज्य का कोई भी संरक्षित स्मारक जर्जर नहीं: केंद्र
महेंद्र भट्ट द्वारा उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने जानकारी दी कि राज्य में 43 प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल राष्ट्रीय महत्व के घोषित हैं।
केंद्र सरकार की ओर से यह सुखद जानकारी दी गई कि उत्तराखंड में केंद्र द्वारा संरक्षित कोई भी स्मारक या पुरातात्विक स्थल जर्जर अवस्था में नहीं है। सभी स्थलों का संरक्षण एवं अनुरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा राष्ट्रीय संरक्षण नीति के अनुरूप किया जा रहा है।
राज्य के प्रमुख संरक्षित स्मारकों में शामिल
केंद्र द्वारा संरक्षित स्थलों में जागेश्वर मंदिर समूह, बद्रीनाथ मंदिर समूह, द्वारहाट के मंदिर, बैजनाथ धाम, हनोल का महासू मंदिर, लखामंडल, कलसी का अशोक शिलालेख, पाताल भुवनेश्वर गुफाएँ, आदि बद्री, बालेश्वर मंदिर समूह चम्पावत, रुद्रनाथ मंदिर, सीताबनी मंदिर, गोपेश्वर, काशीपुर और रुड़की क्षेत्र के पुरातात्विक स्थल सहित अनेक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल शामिल हैं।
केंद्र की पहल से संरक्षण और विकास को नई गति
प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा वनों, वन्यजीवों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर उठाए जा रहे कदम उत्तराखंड के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इससे न केवल पर्यावरण संतुलन मजबूत होगा, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान भी सुरक्षित रहेगी।

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