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भैरव सेना ने बदरी-केदार मंदिर समिति पर लगाए आरोप, राज्यपाल को भेजा ज्ञापन

देहरादून। देवभूमि की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक अस्मिता की रक्षा के लिए कार्यरत संगठन भैरव सेना (देवभूमि भैरव वाहिनी) ने श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में कथित प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए महामहिम राज्यपाल को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से प्रेषित किया है। ज्ञापन संगठन के देहरादून जिला अध्यक्ष अनिल कुमार के नेतृत्व में सौंपा गया।
इस दौरान आयोजित कार्यक्रम में भैरव सेना के केंद्रीय अध्यक्ष संदीप खत्री मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि बदरीनाथ एवं केदारनाथ धाम करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की आस्था के सर्वोच्च केंद्र हैं, लेकिन वर्तमान प्रबंधन एवं बोर्ड की कथित कार्यप्रणाली के कारण देवभूमि उत्तराखंड की छवि प्रभावित हो रही है।
भैरव सेना ने आरोप लगाया कि मंदिर समिति द्वारा वीआईपी दर्शन के नाम पर श्रद्धालुओं से प्रति व्यक्ति 1100 रुपये का शुल्क लिया जा रहा है। संगठन का कहना है कि यह व्यवस्था आस्था के केंद्रों में आर्थिक आधार पर भेदभाव पैदा करती है तथा धार्मिक व्यवस्था के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देती है।
संगठन ने दावा किया कि वर्ष 2025 में चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या वर्ष 2024 की तुलना में लगभग साढ़े तीन लाख अधिक रही, लेकिन इसके बावजूद मंदिर समिति की आय में करीब 13.5 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। भैरव सेना ने इसे दान एवं चढ़ावे के प्रबंधन में संभावित वित्तीय अनियमितताओं का संकेत बताया है और इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ज्ञापन में मंदिर समिति के कैंप कार्यालय को जोशीमठ से ऋषिकेश स्थानांतरित किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठन का आरोप है कि यह निर्णय नियमों के विपरीत लिया गया। साथ ही यह भी दावा किया गया कि ऋषिकेश में समिति के अपने गेस्ट हाउस उपलब्ध होने के बावजूद अन्य भवन को किराये पर लेकर अनावश्यक खर्च किया गया तथा सीएसआर फंड के उपयोग में भी अनियमितताएं हुईं।
भैरव सेना का कहना है कि उसकी शिकायत के आधार पर गृह विभाग द्वारा विशेष जांच कराई गई थी। संगठन ने आरोप लगाया कि जांच में कई गंभीर बिंदुओं की पुष्टि होने के बावजूद रिपोर्ट पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। संगठन ने इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।
भैरव सेना ने राज्यपाल से मांग की है कि वर्तमान मंदिर समिति बोर्ड को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाए तथा पूरे प्रकरण की स्वतंत्र न्यायिक या किसी केंद्रीय जांच एजेंसी से समयबद्ध जांच कराई जाए। संगठन का कहना है कि धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा के लिए कठोर कदम उठाए जाने आवश्यक हैं।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वह लोकतांत्रिक तरीके से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा। इसके प्रथम चरण में प्रदेश के पर्यटन एवं धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज के सरकारी आवास पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की गई है।
ज्ञापन सौंपने और विरोध प्रदर्शन के दौरान जिला उपाध्यक्ष गजेंद्र चौहान, प्रदेश संगठन मंत्री गणेश जोशी, जिला सचिव मनीष कुमार, मीडिया प्रभारी गोरी कोटियाल एवं संदीप कुमार, केंद्रीय सचिव संजय पवार, युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष मयंक मलेथा, राजकुमार, राहुल सूद, जिला उपाध्यक्ष गीता बिष्ट सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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