भूपेंद्र रोतेला
नारायणबगड़/चमोली। पिंडरघाटी के ब्लाक नारायणबगड़ अंतर्गत ग्राम असेड़ में 4 गते बैशाख को आयोजित असेड़ कौथिग इस वर्ष भी आकर्षण का केंद्र रहा। धार्मिक आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के इस अद्भुत संगम ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया।
मेले का शुभारंभ पौराणिक रीति-रिवाजों के तहत मृत्युंजय महादेव की डोली और निशाणों की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुआ। पुजारियों ने मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न कर मेले की शुरुआत की।
इसके बाद भूमियाल और क्षेत्रपाल देवता की अगुवाई में ढोल-दमाऊं, शंखनाद और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच मृत्युंजय महादेव के पाश्वों को पटांगण चौक में अवतरित किया गया। इस दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालु भावविभोर नजर आए।
स्थानीय निवासी खिलाप राणा ने बताया कि यह मेला गहरी आस्था का प्रतीक है। मान्यता है कि मृत्युंजय महादेव की कृपा से संतान सुख की प्राप्ति होती है, जिसके कारण दूर-दराज से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
इस अवसर पर मेला समिति के अध्यक्ष सूरज मलियाल, उपाध्यक्ष वीरेन्द्र भंडारी, सचिव दीपक बूटोला, कोषाध्यक्ष पंकु भंडारी सहित सदस्य अरविन्द, मनीष, सतेंद्र, कुंवर, आयुष, कुल्लू और नवीन उपस्थित रहे। मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए चौकी इंचार्ज नारायणबगड़ देवेन्द्र कुमार के नेतृत्व में प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य पौराणिक विरासत और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना रहा, ताकि हमारी सांस्कृतिक पहचान और धरोहर भविष्य में भी जीवित रह सके।

