हरीश चमोली
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति का इतिहास हमेशा बदलाव का गवाह रहा है। राज्य गठन के बाद से 2017 तक यहां की जनता ने सत्ता में अदला-बदली का ट्रेंड बनाए रखा, कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा। लेकिन 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में इस परंपरा को तोड़ते हुए मतदाताओं ने लगातार दो बार भाजपा को सत्ता सौंपी।
अब आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा एक बार फिर आश्वस्त नजर आ रही है। इस बार पार्टी को न सिर्फ प्रधानमंत्री नरेन्द्र की लोकप्रियता पर भरोसा है, बल्कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिँह धामी के नेतृत्व को भी बड़ा फैक्टर माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2017 और 2022 में मोदी फैक्टर ने भाजपा की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। कांग्रेस उस दौरान मजबूत चुनौती पेश नहीं कर सकी थी। हालांकि इस बार कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए जमीन पर ज्यादा मेहनत करती दिख रही है, लेकिन अभी भी भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
भाजपा अपनी रणनीति में विकास कार्यों, केंद्र सरकार के सहयोग और बड़े फैसलों को प्रमुखता दे रही है। पार्टी का दावा है कि राज्य में बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, पर्यटन और सांस्कृतिक विकास में उल्लेखनीय काम हुआ है। इसके अलावा समान नागरिक संहिता और धर्मांतरण विरोधी कानून जैसे फैसलों को साहसिक कदम बताते हुए भाजपा इन्हें जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता का आधार मान रही है।
मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में सरकार ने विकास और हिंदुत्व एजेंडे को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश की है। यही वजह है कि अब मोदी लहर के साथ-साथ ‘धामी लहर’ की भी चर्चा शुरू हो गई है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि फिलहाल राज्य की जनता सरकार के कामकाज से संतुष्ट नजर आ रही है। यदि यही माहौल बना रहा, तो आगामी चुनावों में भाजपा को एक बार फिर बढ़त मिल सकती है।
हालांकि चुनाव में अभी समय है और राजनीतिक समीकरण बदल भी सकते हैं, लेकिन इतना तय है कि भाजपा इस बार भी मोदी के करिश्मे और धामी के नेतृत्व के दम पर जीत की उम्मीद लगाए बैठी है।

