भूपेंद्र रौतेला
नारायणबगड़। उत्तराखंड की विरासत, लोकदेव परंपरा और आस्था के प्रतीक उत्तरी कड़ाकोट के डूँगरी गांव में 40 वर्षों बाद नागिनी माता जेठुलाबार की देवरा यात्रा के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंगलवार रात से शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान के दौरान पूरा गांव वैदिक जागर सम्राट मंगलेश डंगवाल के जागरों और उनकी सांस्कृतिक टीम के मंगल गीतों व नृत्य से गुंजायमान रहा। इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए प्रवासी ध्याणियों सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु ब्लाक नारायणबगड़ के दूरस्थ डूँगरी जेठुलाबार पहुंचे।
नैणी देवी के ब्रह्म गुरु गणवें हरिबल्लभ सती के सानिध्य में सोमवार रात करीब 8:30 बजे ब्रह्म बंधन का धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हुआ, जो मंगलवार सुबह लगभग 4:30 बजे तक चला। इसके बाद सुबह करीब 4:30 बजे नैणी माता ने श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। माता के दर्शन होते ही पूरा वातावरण जयकारों से गूंज उठा और श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
इस दौरान नैणी माता के निशान के साथ असूलदोन और भूमियाल देवता के निशानों के साथ देव पश्वाओं ने अवतरित होकर श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। श्रद्धालुओं ने देव डोलियों और निशानों के समक्ष शीश नवाकर परिवार और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
वैदिक मंगलेश डंगवाल के जागरों पर रातभर झूमे माताभक्त*
धार्मिक आयोजन में वैदिक जागर सम्राट मंगलेश डंगवाल और उनकी टीम की भक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। शुरुआत श्री गणेश वंदना के साथ और उसके बाद नैणी देवी, मां नंदा और भगवती के जागरों एवं मंगल गीतों की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को रातभर झूमने पर मजबूर कर दिया। जागरों की गूंज, देवी-देवताओं के जयकारों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच डूँगरी गांव में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
40 वर्षों बाद आयोजित इस धार्मिक अवसर को लेकर ग्रामीणों और प्रवासियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। गांव से बाहर रहने वाले लोग भी अपनी आराध्य देवी के दर्शन और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे।
*छह माह तक गांव-गांव पहुंचेगी माता की निशाण*
नागिनी माता की देवरा यात्रा आगामी लगभग छह माह तक चलेगी। इस दौरान माता की निशाण विभिन्न गांवों में पहुंचकर ध्याणियों के घरों में दर्शन देगी। उत्तराखंड की लोक परंपरा में ध्याणी उन विवाहित बेटियों को कहा जाता है, जिनका मायका उनके लिए भावनात्मक, सांस्कृतिक और पारिवारिक जुड़ाव का केंद्र होता है।
देवरा यात्रा के दौरान ध्याणियां माता का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत करेंगी और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली तथा मंगलकामना के लिए पूजा- अर्चना करेंगी। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार माता को भेंट भी अर्पित करेंगे।
डूँगरी में 40 वर्षों बाद आयोजित यह धार्मिक आयोजन न केवल क्षेत्र की प्राचीन लोकदेव परंपराओं को जीवंत कर रहा है, बल्कि प्रवासी ग्रामीणों को अपनी जड़ों, संस्कृति और आराध्य देवी से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बना है।
पंडाल में आयोजित कार्यक्रम का संचालन पीएन सती और कुशला नंद ने किया।
दयोरा समिति के अध्यक्ष अनिल उनियाल द्वारा सभी आये हुए भक्तों को एस ऐतिहासिक क्षणों का अविस्मरणीय हिस्सा बनने हेतु धन्यवाद किया गया।

