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कर्णप्रयाग नगर पालिका में टेंडर से पहले 60% काम पर भड़के गणेश शाह, बोले किसी को बख्शा नहीं जाएगा

कर्णप्रयाग। कर्णप्रयाग नगर पालिका क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। जिन कार्यों की टेंडर प्रक्रिया अभी शुरू भी नहीं हुई थी, उन्हीं कार्यों का करीब 60 प्रतिशत निर्माण कार्य पहले ही पूरा कर लिया गया। मामले की जानकारी मिलने के बाद नगर पालिका अध्यक्ष गणेश शाह ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ मौके पर निरीक्षण किया और स्पष्ट कहा कि चाहे कोई भी व्यक्ति या ठेकेदार क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। बिना कार्यादेश के किए गए इस काम को श्रमदान माना जाएगा और इसके लिए किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाएगा।

कर्णप्रयाग नगर पालिका क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और ठेकेदारी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन विकास कार्यों की निविदाएं अभी निविदा पेटी में पड़ने और खुलने की प्रक्रिया में भी नहीं पहुंची थीं, उन्हीं कार्यों का करीब 60 प्रतिशत निर्माण कार्य पहले ही पूरा कर लिया गया।
इस पूरे मामले की जानकारी स्वयं नगर पालिका परिषद कर्णप्रयाग के अध्यक्ष गणेश शाह के माध्यम से सामने आई। मिली शिकायतों के आधार पर अध्यक्ष गणेश शाह ने तुरंत मामले को गंभीरता से लेते हुए वार्ड संख्या 05 के सभासद मनोज पुंडीर, अधिशासी अधिकारी नरेंद्र सिंह रावत और कनिष्ठ अभियंता अंकित नेगी के साथ संबंधित स्थलों का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान जो स्थिति सामने आई, उसने सभी को हैरान कर दिया। जिस कार्य की निविदा प्रक्रिया अभी पूरी भी नहीं हुई थी, उस कार्य का लगभग 60% निर्माण कार्य पहले ही कराया जा चुका था। यह स्थिति स्पष्ट रूप से सरकारी नियमों और निविदा प्रक्रिया का गंभीर उल्लंघन मानी जा रही है।
नगर पालिका प्रशासन ने इस पूरे मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि बिना कार्यादेश के किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य पूरी तरह अवैध है और ऐसी कार्यप्रणाली किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि नगर पालिका परिषद कर्णप्रयाग में पारदर्शिता और नियमों का पालन सर्वोपरि है।
नगर पालिका की ओर से यह भी कहा गया है कि बिना कार्यादेश के किए गए ऐसे निर्माण कार्यों को आम जनता के हित में ‘श्रमदान’ माना जाएगा, अर्थात ऐसे कार्यों के लिए किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाएगा। साथ ही चेतावनी दी गई है कि संबंधित ठेकेदार चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके खिलाफ नियमों के तहत कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पूरे क्षेत्र में यही सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब टेंडर प्रक्रिया शुरू भी नहीं हुई थी, तो 60 प्रतिशत काम आखिर कैसे पूरा हो गया? अब लोगों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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