देहरादून। उत्तराखंड सरकार के संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार गैरोला ने संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और तकनीक आधारित शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुंबई में विभिन्न विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, आईआईटी बॉम्बे तथा महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन किया। इस दौरान संस्कृत शिक्षा को आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल प्लेटफॉर्म और अंतरविषयी (Interdisciplinary) शोध से जोड़ने पर व्यापक चर्चा हुई।
सबसे पहले सोमैया विद्याविहार विश्वविद्यालय के के.जे. सोमैया इंस्टीट्यूट ऑफ धर्म स्टडीज़ में आयोजित बैठक में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अजय कपूर सहित वरिष्ठ शिक्षाविदों ने भाग लिया। बैठक में संस्कृत शिक्षा को प्रमाणपत्र स्तर से लेकर पीएचडी तक सशक्त बनाने, संस्कृत को संस्कृत माध्यम से पढ़ाने, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करने तथा उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार और सोमैया विश्वविद्यालय के बीच एमओयू (MOU) पर सहमति बनाने की दिशा में विचार-विमर्श किया गया। साथ ही नाट्यशास्त्र एवं परफॉर्मिंग आर्ट्स के माध्यम से संस्कृत के प्रचार-प्रसार पर भी बल दिया गया।
इसके बाद मुंबई विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में आयोजित बैठक में विभागाध्यक्ष डॉ. सुचित्रा ताजाणे एवं अन्य शिक्षकों के साथ अकादमिक सहयोग, अंतरविषयी शोध, संस्कृत व्याकरण एवं भाषाविज्ञान, संगीत चिकित्सा, मंत्र आधारित अनुसंधान तथा डिजिटल संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। विभाग ने उच्च गुणवत्ता वाले ऑनलाइन संस्कृत पाठ्यक्रमों (MOOCs) के निर्माण के लिए विशेष स्टूडियो स्थापित करने तथा अनुसंधान एवं शैक्षणिक गतिविधियों के लिए वित्तीय सहयोग की आवश्यकता भी रखी। इस अवसर पर विभाग की ओर से दीपक कुमार गैरोला को विभागीय प्रकाशन ‘गौरीगौरवम्’ भेंट कर सम्मानित किया गया।
आईआईटी बॉम्बे में आयोजित बैठक में संस्कृत और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर विशेष चर्चा हुई। यहां ‘संस्कृत शब्द मित्र’, संस्कृत वर्डनेट, भारतजेन तथा CTIKS जैसी परियोजनाओं की प्रस्तुति दी गई। बैठक में संस्कृत भाषा को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) और डिजिटल ह्यूमैनिटीज़ से जोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया गया। सचिव दीपक कुमार गैरोला ने मंत्र चिकित्सा एवं ‘प्रज्ञा चक्षु’ जैसे विषयों पर वैज्ञानिक एवं अंतरविषयी शोध को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रतिभागियों ने भविष्य में संयुक्त शोध परियोजनाएं संचालित करने पर सहमति व्यक्त की।
मुंबई दौरे के अंतिम चरण में महाराष्ट्र सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में प्रशासनिक अधिकारी डॉ. मंजुषा कुलकर्णी के साथ बैठक हुई। बैठक में शासन, प्रशासन और सार्वजनिक जीवन में संस्कृत के अधिकाधिक उपयोग, सरकारी पत्राचार में संस्कृत शब्दावली के समावेश, संस्कृत भाषी परिवारों के निर्माण, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म, जन-जागरूकता अभियानों तथा शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों के सहयोग से संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर डॉ. मंजुषा कुलकर्णी ने अपनी लिखित संस्कृत पुस्तक एवं उसका अनूदित संस्करण भेंट कर दीपक कुमार गैरोला का सम्मान किया।
मुंबई में आयोजित इन सभी बैठकों का निष्कर्ष संस्कृत शिक्षा को आधुनिक तकनीक, शोध, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल नवाचार और संस्थागत सहयोग के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की साझा प्रतिबद्धता के रूप में सामने आया। उत्तराखंड और महाराष्ट्र के बीच संस्कृत के प्रचार-प्रसार तथा शैक्षणिक सहयोग को लेकर भविष्य में कई महत्वपूर्ण पहल किए जाने की संभावना भी व्यक्त की गई।

