देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड की राजनीति में एक ऐसे नेतृत्व के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने कम समय में स्पष्ट निर्णय, तेज कार्यशैली और जनसेवा को अपनी पहचान बनाया है। युवा ऊर्जा, संवेदनशील सोच और मजबूत प्रशासनिक पकड़ के साथ धामी ने यह साबित किया है कि शासन केवल सत्ता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। उनकी अगुवाई में सरकार जनता के बीच पहुँची है, समस्याओं को सुना गया है और समाधान को प्राथमिकता दी गई है। सरल व्यक्तित्व, दृढ़ संकल्प और विकास के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक जननेता के रूप में अलग पहचान देता है।
राज्य के सभी 13 जनपदों में आयोजित 144 शिविरों के माध्यम से अब तक 83,852 से अधिक नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ दिया गया है। इन शिविरों में 13,900 से अधिक शिकायतें व आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 10,478 मामलों का त्वरित निस्तारण कर सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि अब फाइलों में नहीं, फैसलों में गति है।
कार्यक्रम के दौरान 14,920 प्रमाण पत्र मौके पर ही वितरित किए गए, जबकि विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से 52,617 से अधिक लाभार्थियों को सीधा लाभ मिला। ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि धामी सरकार केवल घोषणाओं की सरकार नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम देने वाली सरकार है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, मेरी सरकार का संकल्प स्पष्ट है जनता को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार स्वयं जनता के द्वार तक पहुँचेगी और हर समस्या का समयबद्ध समाधान करेगी। कमजोर, वंचित और दिव्यांग किसी भी स्थिति में पीछे नहीं छूटेंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि शिविरों में प्राप्त हर शिकायत का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। जो लाभार्थी किसी कारणवश शिविरों तक नहीं पहुँच पा रहे हैं, उनके लिए अधिकारी स्वयं घर जाकर समाधान करें और सरकारी योजनाओं की जानकारी अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाई जाए।
आज “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम उत्तराखंड में भरोसे, पारदर्शिता और परिणाम आधारित शासन की पहचान बन चुका है, जो यह साबित करता है कि सरकार जब जनता के साथ खड़ी होती है, तो समाधान अपने आप रास्ता बना लेते हैं।
