देहरादून । खटीमा की गलियों में हलचल थी और सुबह के ठीक 9 बजे, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आम लोगों के बीच थे। किसी बड़े मंच से नहीं, बल्कि सीधे जमीन पर वही ज़मीन, जहाँ लोग उम्मीद लेकर इंतज़ार करते हैं कि कोई उनकी भी सुने।
ऊधमसिंहनगर के खटीमा से शुरू हुआ एक जननेता का दिन, जहाँ उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को साफ निर्देश दिए समस्या आए तो फाइलों में न उलझे, समाधान करें। लेकिन यहीं रुकना उनका मक़सद नहीं था।कुछ ही घंटों बाद उनका हेलिकॉप्टर चमोली के नंदानगर की ओर उड़ चला वहाँ, जहाँ हाल ही में आपदा ने लोगों की ज़िंदगी को झकझोर कर रख दिया था।
पगडंडियों पर चलते हुए मुख्यमंत्री पीड़ितों के बीच पहुँचे।
न कोई औपचारिकता, न भाषण सिर्फ़ दिल से बातचीत।
उन्होंने पीड़ितों का हाथ थामा और कहा, आप अकेले नहीं हैं सरकार आपके साथ खड़ी है, हर कदम पर।
वहाँ से निकले तो रुद्रप्रयाग और चमोली के अन्य आपदा प्रभावित इलाकों का हवाई निरीक्षण किया। आसमान से दिख रहा था तबाही का मंजर, लेकिन सीएम की आंखों में दिख रहा था संकल्प कि इन्हें फिर से खड़ा करना है।
रुद्रप्रयाग पहुंचकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की, और दो टूक कहा पुनर्निर्माण में देरी नहीं चलेगी, जनता को राहत चाहिए।
लौटते समय उन्होंने श्रीनगर में माँ धारी देवी के दर्शन किए।
सिर झुका और मन में उत्तराखंड की जनता की सलामती की प्रार्थना थी।
शाम होते-होते वो देहरादून लौट आए। थके नहीं थे, बल्कि अगले कार्यों के लिए पूरी तरह तैयार थे।
उसके बाद भाजपा नेताओं के साथ बैठकें हुईं, शासन-प्रशासन के मुद्दों पर मंथन हुआ।
