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कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी से जाने जाते प्रभात किशोर डिमरी

चमोली।सीमांत जनपद चमोली के जोशीमठ तहसील स्थित पाखी गांव के रहने वाले प्रभात किशोर डिमरी को विद्युत नियामक आयोग का तकनीकी सदस्य नियुक्त किया गया।

वैंसे तो उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश कहा जाता है, हाइड्रो पावर सेक्टर हमेशा से ही उत्तराखंड और देश की उन्नति का अभिन्न हिस्सा रहा है। उत्तराखंड में पॉवर सेक्टर में काम करने वाले कई ऐसी हस्तियां हैं जिन्होंने मेहनत, ईमानदारी एंव कर्तव्यपरायणता से इस ऊर्जा प्रदेश की धरती को अभिसिंचित किया है।

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के निदेशक तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी के बारे में। प्रभात उन चंद लोगों में से एक हैं जिन्होंने अपने जीवनकाल में कई मल्टीनेशनल कंपनियों के ऑफर ठुकरा कर अपने प्रदेश अपनी मिट्टी की सेवा करने का निर्णय लिया। प्रभात किशोर डिमरी ने अपनी कई दशकों की सेवा समर्पण और कर्तव्य परायणता के बूते उत्तराखंड के ऊर्जा प्रदेश के सपने को साकार करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रभात किशोर डिमरी सीमांत जनपद चमोली के जोशीमठ तहसील स्थित पाखी गांव के रहने वाले हैं।

प्रभात का योगदान न सिर्फ हाइड्रो पावर सेक्टर के रूप में है बल्कि उन्होंने प्रदेश में उपभोक्ता जन जागरुकता, पर्यटन विकास में अभूतपूर्व कार्य किए हैं। प्रभात किशोर डिमरी उत्तराखंड में एकमात्र व्यक्ति, जिसके पास रोपवे निर्माण, संचालन और रखरखाव के साथ-साथ बिजली के उत्पादन, वितरण और ट्रांसमिशन में व्यापक अनुभव है।

उत्तराखंड में रोपवे संचालन में प्रभात ने ग्रीन टूरिज्म के कॉन्सेप्ट को आगे बढाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने जोशीमठ और औली में रोपवे सिस्टम के लिए एक व्यावसायिक मॉडल भी तैयार किया। उन्होंने चेयरलिफ्ट और स्किलिफ्ट परियोजना औली के निर्माण कमीशनिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सीमांत जनपद चमोली का होने की वजह से प्रभात का पहाड़ के प्रति विशेष लगाव रहा है लिहाजा उन्होंने रोपवे के साथ ही जोशीमठ चैयर लिफ्ट एवं स्की लिफ्ट प्रोजेक्ट में भी अग्रणी भूमिका निभाई है।
वर्तमान में प्रभात डिमरी उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग में तकनीकी निदेशक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वर्ष 2008 में प्रभात ने उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग बतौर उपनिदेशक कार्यभार संभाला था बीते 15 सालों में आयोग में कार्यरत रहने के दौरान उन्होने रिकॉर्ड समय में आयोग के भवन का निर्माण कराने के साथ ही प्रदेश भर में विद्युत उभोक्ता जन जागरूकता जैसे महत्पूर्ण अभियानों का भी नेतृत्व किया है।

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग में सेवाएं देने के से पूर्व वर्ष 2005 से 2008 तक प्रभात किशोर डिमरी उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड यूजेवीएन लि में बतौर अधिशासी अभियंता तैनात रहे। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड की कई जल विद्युत परियोजनाओं के उत्पादन व तकनीकी क्षेत्र में अपना योगदान दिया। वर्ष 2008 में यूजेवीएन लि में अधिशासी अभियंता उत्पादन रहते हुए चीला पावर हाउस में वित्तीय वर्ष 2007-08 में सबसे अधिक रिकॉर्ड उत्पादन करने में कामयाबी हासिल की। इससे पूर्व प्रभात ने 1996 से 2005 तक गढवाल मंडल विकास निगम में जोशीमठ-औली-गोर्सो टूरिस्ट रोपवे, जोशीमठ चेयर लिफ्ट और स्की लिफ्ट प्रोजेक्ट औली में ऑपरेशन मैनेजर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रभात किशोर डिमरी की प्रारंभिक शिक्षा सुदूरवर्ती चमोली जनपद में हुई इसके बाद 1986 में प्रभात किशोर डिमरी पीजी कॉलेज गोपेश्वर से ग्रेजुएशन की। वर्ष 1992 में डिमरी ने इलेक्ट्रिकल में बीई यानी डिग्री इन इंजीनियरिंग किया। प्रभात नौकरी में आने के साथ ही पढाई जारी रखी जिसके बाद उन्होंने एमबीए इन फाइनेंस, इलेक्ट्रिसिटी डिसटीब्यूशन मैनेजमेंट में एडवांस सर्टिफिकेट और एलएलबी यानी वकालत में भी डिग्री हासिल की। प्रभात किशोर डिमरी की कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी इनकी शुरुआत से ही पहचान रही है।

वही उनके सहयोगी सुरदर्शन खत्री ने ख़ुशी जताते हुए कहा कि प्रभात किशोर डिमरी का विद्युत नियामक आयोग का तकनीकी सदस्य नियुक्त होने पर चमोली जिले में एक अलग ही हर्ष का माहोल देखने को मिल रहा है।

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