अधिकारियों के आदेश बने छोटे कर्मचारियों के गले की फांस

देहरादून।  कोरोना महामारी के चलते जहां सरकार तमाम जरूरी एहतियात बरत रही है और नागरिकों को भी सतर्कता बरतने की सलाह दे रही हैं, वहीं कुछ अधिकारियों के ऊल – जुलूल आदेश छोटे कर्मचारियों के लिए गले की फांस बन रहे हैं। ऐसा ही एक फरमान महिला व बाल विकास विभाग में सामने आया है।

विभाग ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं को आदेश दिया है कि वो लाभार्थियों को वितरित किए जाने वाले राशन उनके घर – घर जा कर वितरित करें। ऐसे में बहुत कम मानदेय पर काम करने वाली इन महिला कर्मियों की समझ में नहीं आ रहा है कि वो इस राशन को लाभार्थियों के घर तक कैसे पहुंचाए?

गौरतलब है कि महिला व बाल विकास विभाग द्वारा प्रतिमाह की 5 तारीख को आंगनवाड़ी व मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के अलावा 6 माह से 3 वर्ष तक बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं को टेक होम राशन योजना के तहत पोषाहार वितरित किया जाता है। यह पोषाहार आंगनवाड़ी व मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों पर ही वितरित किया जाता है। लेकिन कोरॉना महामारी के चलते लॉक डाउन के कारण विभाग ने अप्रैल माह का राशन लाभार्थियों के घर ही भिजवाने का आदेश जारी कर दिया है।

टेक होम राशन के तहत एक लाभार्थी को करीब ढाई से तीन किलोग्राम पोषाहार वितरित किया जाता है। मैदानी क्षेत्रों में एक केंद्र पर लाभार्थियों की संख्या सौ के करीब या उससे भी ज्यादा है। यानी सौ के करीब लाभार्थियों वाले केंद्र की आंगनवाड़ी कार्यकत्री को दो से तीन क्विंटल राशन घर – घर जा कर वितरित करना पड़ेगा।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं बहुत निम्न व गरीब वर्ग से आती हैं। इनमें बीपीएल, विधवा, विकलांग, परितक्यता व तलाकशुदा महिलाएं कार्य करती हैं। ऐसे में इन महिला कर्मियों के सम्मुख यह संकट पैदा हो गया है कि वो राशन को किस माध्यम से लाभार्थियों के घर तक पहुंचाएं?
इन महिला कार्मिकों की ऐसी भी स्थिति नहीं है कि वो अपने स्तर से संसाधन जुटा कर राशन को लाभार्थियों के घर तक पहुंचाएं।

विभाग के इस आदेश के बाद इन महिला कर्मियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। एक तरफ जहां राशन को घर- घर तक पहुंचाने का फरमान इन महिला कर्मियों के गले की फांस बनी हुई हैं, वहीं उनमें कोरोना महामारी के संक्रमण को लेकर भी भय व दहशत बनी हुई है। महिला कार्मिक लॉक डाउन के कारण आवाजाही को लेकर भी चिंताग्रस्त हैं। उनका कहना है कि सरकार ने 7 से 1 बजे तक का समय खुला छोड़ा है। किन्तु यदि उन्हें कहीं से आने – जाने में देर हो गई तो फिर मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा।

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