अद्वैता ने कहा भाषा व संस्कृति को ज़िंदा रखने के लिए अभियान की जरूरत

देहरादून। विद्या बालन अभिनीत सुपर हिट “कहानी” जैसी फ़िल्मों की पटकथा लेखिका व स्तंभकार सुश्री अद्वैता काला उत्तराखंड में विकास की रफ़्तार पर ख़ुशी जाहिर करती हैं। मगर उनका मानना है कि विकास का स्वागत करने के साथ-साथ भाषा और संस्कृति को बचाने के लिए गंभीर पहल की जानी जरूरी है।

विगत दिवस देहरादून में प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित यूथ कान्क्लेव में शामिल होने पहुंची अद्वैता ने कर्णप्रयाग-ऋषिकेश रेल परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास का सबसे बड़ा उपहार है, हमें अपनी जड़ों से जोड़ना। उन्होंने कहा कि रेल परियोजना के कारण उनके होम टाउन में भी एक जीवंतता है, जो पहले भी ऐसी यहां रही होगी, उन्हें याद नहीं है। एक बार रेल परियोजना पूरी होने के बाद ऋषिकेश से श्रीनगर केवल 2 घंटे की दूरी पर होगा। कई अन्य लोगों की तरह वो भी श्रीनगर के निकट अपने गांव सुमाड़ी तक कम समय में और सुरक्षित रूप से पहुंच सकती हैं।

सुश्री काला विकास की पहल पर ख़ुशी जताने के साथ-साथ भाषा और संस्कृति के पिछड़ने को लेकर चिंतित नजर आती हैं। वह मानती हैं कि अपनी पहचान को ज़िंदा रखने के लिए भाषा और संस्कृति को बचाना आवश्यक है। जरूरत पड़े तो इसके लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि मूल रूप से श्रीनगर के निकट सुमाड़ी गांव निवासी अद्वैता एक बेस्ट सेलिंग अंतरराष्ट्रीय उपन्यासकार हैं। उन्होंने स्कूली शिक्षा देहरादून में पूरी कर विदेश से उच्च शिक्षा प्राप्त की है। उनके पहले उपन्यास “आलमोस्ट सिंगल” की अकेले भारत में ही 150,000 से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं। उनका यह उपन्यास फ्रेंच, मराठी और हिंदी सहित कई भाषाओं में अनुवादित किया गया है। इसे अमेरिका के रैंडम हाउस द्वारा संचालित एक प्रतिष्ठित कार्यक्रम बैंटम डिस्कवरी प्रोग्राम के लिए भी चुना गया था, जो अमेरिकी पाठकों को उपन्यासों में नए रचनाकारों का परिचय कराता है।

अद्वैता एक पुरस्कार विजेता पटकथा लेखक हैं, जिनमें से “कहानी” फिल्म सबसे ज्यादा उल्लेखनीय है। अद्वैता के लेखन में शैलियों को पार करने की क्षमता अद्वितीय है। उन्होंने फिल्म, फिक्शन, प्राइम टाइम टेलीविज़न के लिए टीवी शो तो लिखे ही हैं। साथ ही राजनीति से लेकर सामाजिक सरोकारों और महिला अधिकारों तक कई मुद्दों पर आधारित उनके स्तंभ प्रमुख प्रकाशनों में छपते रहते हैं।

उनका फिल्मी और साहित्यिक लेखन कार्य महिला सशक्तिकरण के विषय और अनुभवों पर केंद्रित है। वह एक लोकप्रिय खाद्य स्तंभकार भी हैं। अद्वैता प्रमुख टी वी चैनलों खास कर अंग्रेजी चैनलों पर होने वाली डिबेट्स का एक्सपर्ट के रूप में एक नियमित चेहरा होने के साथ-साथ व्यापक सामाजिक मुद्दों पर एक टिप्पणीकार भी हैं। अद्वैता अब अलग लेखन शैलियों (गैर कथा साहित्य) पर भी काम कर रही हैं। संभवतः अद्वैता भारत में एकमात्र ऐसी लेखिका हैं जो कई विधाओं में लेखन कर रही हैं।

अद्वैता “वर्ड्स काउंट – द फेस्टिवल ऑफ वर्ड्स” और एक पॉडकास्ट (इंटरनेट रेडियो) शो “द डेमोक्रेट” के नाम से का भी प्रबंधन करती हैं। यह शो भारत को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर वार्तालाप के माध्यम से विभिन्न वैचारिक दृष्टिकोणों को संलग्न करता है। उनके कार्यक्रमों में देश की तमाम जानी मानी हस्तियां सम्मिलित हो चुकी हैं। बहुत कम उम्र में अद्वैता कई पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं, जिनमें ज़ी सिने अवार्ड, स्क्रीन अवार्ड, टाइम्स ऑफ इंडिया फिल्म अवार्ड, फेमिना पावर लिस्ट अवार्ड -2015, इंस्पायर अवार्ड, महिला और बाल कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 100 वूमेन अचीवर्स अवॉर्ड (2016), लक्जरी लीग अवार्ड 2017 , समाचार 24 द्वारा जश्न – ए- यंगिस्तान अवॉर्ड अर्थपूर्ण लेखन के लिए 2017 आदि कुछ प्रमुख हैं।

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