अजेंद्र बोले, रावत का जमीर तब कहां चला गया था, जब आपदा पीड़ितों को राहत के नाम पर बंदरबांट की गई

देहरादून। कोरोना संकट के समय कांग्रेस नेताओं द्वारा बात – बेबात पर धरना देने और बयानबाजी करने को लेकर भाजपा ने आपत्ति जताई है। भाजपा ने फिर दोहराया है कि ऐसी आपदा के समय में कांग्रेस नेता अराजकता फैलाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।

भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी अजेंद्र अजय ने कहा कि कांग्रेस नेता बेवजह के मुद्दों को तूल देने में लगे हुए हैं। कांग्रेस की स्थिति आज जितने नेता, उतनी बातें जैसी हो रखी है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी ने पूरे विश्व को अनायास ही एक अलग तरह के संकट में डाल दिया है। केंद्र व प्रदेश सरकार इस संकट में कई मोर्चों पर एक साथ लड़ रही हैं। सरकारों के प्रयासों के बेहत्तर परिणाम भी सामने आए हैं। मगर अभी भी चुनौतियां कम नहीं हैं। ऐसे समय में अच्छा होता कि कांग्रेस नेता मीडिया व सोशल मीडिया के प्लेटफार्म का उपयोग सरकार के विरूद्ध दुष्प्रचार और माहौल खराब करने के बजाय सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने में करते। उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में प्रवासी घर वापस लौट रहे हैं। सरकार अपने स्तर से उन्हें इस बीमारी से खुद भी बचने और अन्यों को भी बचाने के लिए तमाम स्तरों से जागरूक करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेताओं को चाहिए कि वे ऐसे समय में लोगों को भड़काने के बजाय उन्हें जागरूक करने के लिए प्रयास करें।

भाजपा मीडिया प्रभारी अजेंद्र ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा प्रवासी मजदूरों के साथ सड़क दुर्घटना के मामले में धरना दिए जाने और केंद्र व प्रदेश सरकार के जमीर पर सवाल उठाए जाने पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने श्री रावत को केदारनाथ आपदा की याद दिलाई और उनसे सवाल किए। उन्होंने कहा कि श्री रावत का जमीर तब कहां चला गया था, जब आपदा पीड़ितों को राहत के नाम पर बंदरबांट की गई? श्री रावत के जमीर ने तब क्यों नहीं सवाल उठाए जब केदारनाथ पुनर्निर्माण में घोटाला हुआ? श्री रावत के मुख्यमंत्रित्व काल में उनके सचिव आई ए एस अधिकारी मो. शाहिद स्टिंग ऑपरेशन में फंसे और खुद श्री रावत विधायकों की खरीद – फरोख्त में जब टॉप अप करने की बात कर रहे थे, तब रावत का जमीर गायब हो गया था ?

 

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