चौहान बोले, शर्मनाक बयानबाजी से बाज नहीं आ रही कांग्रेस 

देहरादून। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता व विधायक  मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि कोरोना जैसी आपदा के समय में भी कांग्रेस शर्मनाक बयानबाजी करने से बाज नहीं आ रही जिस प्रकार नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से कोटा राजस्थान से उत्तराखण्ड लाये गए लगभग 250 छात्रों को लेकर बयानबाजी की है यह कांग्रेस की संकीर्ण और घटिया सोच को दर्शाता है |
अच्छा होता कि कांग्रेस प्रदेश सरकार के इस प्रयास की सराहना करती कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के साथ राज्य सरकार ने एक बेहतर व प्रभावी समन्वय बनाकर इन छात्रों को उनके घर लाने का कार्य किया |
श्री चौहान ने कहा कि मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूँ कि क्या आपदा जैसी स्थिति में पड़ोसी राज्यों के साथ तालमेल से कार्य नहीं करना चाहिए ? वहीं दूसरी ओर जहाँ राज्य सरकार ने शुरूआती दौर में दूसरे प्रदेशों के लोगों को भी उनके प्रदेशों तक भिजवाने का कार्य किया उस पर भी कांग्रेस द्वारा घोर संकीर्णता का परिचय देते हुए निम्न स्तर की बयानबाजी की गयी जबकि राज्य सरकार बहुत ब्यापक व मानवतावादी दृष्टिकोण अपनाते हुए लाक डाउन के कारण उत्तरखण्ड में फंसे अन्य प्रदेशों के लोगों विशेष रूप से माइग्रेंट वर्कर (कामगार प्रवासी) की भोजन व रहन – सहन व सभी प्रकार की ब्यवस्थाएँ कर ‘एक भारत हम सभी भारतीय’ के आधार पर सभी प्रदेशों के लोगों के प्रति उदारता का परिचय दे रही है | साथ ही उन्होंने कहा की अभी प्रदेश में कई तीर्थयात्री फंसे हुए हैं वो हमारे अतिथि हैं उन्हें भी सरकार उनके घरों तक पहुँचाने की ब्यवस्था कर रही है | उन्होंने कहा की कांग्रेस ने यहाँ तक सवाल उठाया कि कोटा व अन्य स्थानों से अपनों अपनों को ही लाया गया हो यह भी बहुत ही संकीर्ण व निम्न स्तरीय मानसिकता का प्रतीक है जहाँ तक कांग्रेस का यह कहना है कि अन्य प्रदेशों में फंसे हुए लोगों को लाने के लिए राज्य सरकार को केंद्र से अनुमति लेनी होगी तो शायद कांग्रेस के नेताओं को इतना तो आभास होगा कि एपिडेमिक एक्ट (महामारी ऐक्ट) और डिजास्टर एक्ट (आपदा ऐक्ट) के तमाम सारे प्रावधानों के तहत बहुत सारी परिस्थितियों में भारत सरकार के दिशा – निर्देशों व गाइड लाइन का अनुशरण करना अनिवार्य होता है जिसमें भारत सरकार को अलग – अलग स्थानों व अलग – अलग प्रदेशों की परिस्थिति के आधार पर निर्णय लेने पड़ते हैं जैसे कौन सा प्रदेश या स्थान महामारी/संक्रमण से कितना प्रभावित है तथा अन्तर्राज्य मूवमेंट से उस पर क्या प्रभाव पड़ेगा आदि साथ ही यह भी कहना है कि अन्य प्रदेशों में फंसे छात्रों की परिस्थिति दूसरे प्रदेशों में फंसे अन्य प्रवासी चाहे वो कामगार हों अथवा कर्मचारी आदि से भिन्न होती है यद्यपि उनके सम्मुख भी कई संकट खड़े हो रहे हैं किन्तु छात्रों की परिस्थितियों से उनकी परिस्थितियों की तुलना नहीं की जा सकती है |
प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी ब्यक्तिगत तौर प् भी दूसरे प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से निरंतर संवाद बनाते हुए अपने प्रदेश के दूसरे प्रदेशों ने फंसे हुए नागरिकों की कुसल क्षेम के साथ ही उनके खान पान व रहन सहन की चिंता कर रहे हैं |
इसी प्रकार विगत दिनों कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि ऋषिकेश व हरिद्वार से विदेशी नागरिकों को बसों द्वारा दिल्ली तक क्यों भेजा गया जबकि अपने प्रदेश के लोग लाक डाउन की वजह से प्रदेश में नहीं आ पा रहे हैं इस पर कांग्रेस के मित्रों से पूछना चाहता हूँ कि हर देश विदेशों में फंसे हुए अपने नागरिकों को evacuate नहीं कराता ? क्या भारत में इसी कोरोना के तहत विदेशों में फंसे अपने नागरिकों को देश सकुशल लाने का कार्य नहीं करती ? हरिद्वार ऋषिकेश से जिन्हें भेजा गया उन देशों के दूतावासों ने भारत के विदेश मंत्रालय के माध्यम से उत्तराखण्ड राज्य को जो निर्देश / एडवाइजरी जारी की गयी उसी के आधार पर पारदर्शी प्रक्रिया के तहत उन्हें भिजवाने का कार्य किया गया जिसकी सम्पूर्ण जानकारी प्रशासन के पास है | उन्होंने कहा कि कांग्रेस आपदा की इस घड़ी में राजनीति न करे |

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